बस यूँ ही लिख दिया

लिखा जो कुछ भी मैने कभी
बस यूँ ही लिख दिया
विचारों को अपने किसी तरह्
कागज़ पर बिखेर दिया ।

लेखनी ने नहीं दिया साथ कभी
रफ्तार को मन की ना पकड़ पायी वो
बह् निकले गुबार यूँ ही कहीं
ना पा सके आकार वो शब्दों का “मही”

Add comment जनवरी 30, 2008 vyapoo

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1 comment जनवरी 25, 2008 vyapoo

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